लै करुवो कौपीन कामरी, कुंजनि कुंजनि कूल विलास।

Nagaridev Vani — श्री नागरीदेव

Verse 6 of 15

लै करुवो कौपीन कामरी, कुंजनि कुंजनि कूल विलास। तब मिलि हैं मीत मनमुदित, श्रीविहारीविहारिनिदासि खवासि॥ - श्री नागरिदेव जू, श्री नागरिदेव जू की वाणी (2) लै करुवो कौपिन कमरि, कुंजनि कुंजनि कुल विलास। तब मैंने पाया कि मेरा मन आनंद से भर गया, श्री विहारिहरिदासी खवासी.. - श्री नागरीदेव जू, श्री नागरीदेव जू की वाणी (2)
हीरा कौं ललिचात लिवासीमुसिक्यात जात सखी कहत बात