हीरा कौं ललिचात लिवासी
Nagaridev Vani — श्री नागरीदेव
Verse 8 of 15
नित्य विहार सार सबको, अति दुर्लभ अगम अपार।
अनन्य धर्म संधि समझै बिन, माया कठिन किवार॥
- श्री नागरीदेव जी, श्री नागरीदेव जु की वाणी (4)
नित्य विहार हर चीज़ का सार है, अत्यंत दुर्लभ और अथाह। बिना किसी धर्म संधि को समझे माया बोलेगी.. - श्री नागरीदेव जी श्री नागरीदेव जू की वाणी (4)