कीवे कहा पढ़वे को कहा फल
Nikunj Ras Vallari — हित गोपाल दास
Verse 104 of 108
कालिंदी तट घूमि पिया चरण चूमि चूमि,,वृन्दावन बास कर जीवन सुधार ले।।
भज ले श्री राधा राधा कट जाय जीवन बाधा,,सेवा कुंज कुंजन को पलकन बुहार ले।।
दोऊ मिल रास करें,हास परिहास करें,,लता विटप नैन छबि में उतार ले।।
हित गोपाल प्यारी जामे दोउ नृत्य करें,,वृन्दावन दिव्य छबि हिय में तू धार ले