श्यामा चरण कमल की आस
Nikunj Ras Vallari — हित गोपाल दास
Verse 105 of 108
प्रिया तेरे चरण कमल की चेरी।
कुञ्ज द्वार पै ठाडी कब सों, करो नहीं अब देरी॥
कृपा करो अब झलक दिखावो, ये अभिलाषा मेरी।
सेवा कुञ्ज निकुञ्ज भवन में, नित ही करो तुम फेरी॥
दया करो अब भूल न जइयो, रखियो अपनी चेरी।
'हित गोपाल' की भोरी स्वामिनि, सुन लो विनती मेरी॥