कीवे कहा पढ़वे को कहा फल
Nikunj Ras Vallari — हित गोपाल दास
Verse 106 of 108
मोहे वास सदा वृन्दावन कौ , मैं नित उठ जमुना पुलिन नहाऊँ ।
गिरि गोवर्धन की दऊँ परिकम्मा , दर्शन कर जीवन सफल बनाऊँ ॥
सेवाकुंज की करूँ आरती , ब्रज की रज में ही मिल जाऊं ।
ऐसी कृपा करो श्री स्वामिनी , वृन्दावन छोड़ बाहर नहिं जाऊं ॥