श्रीराधामाधव रंगे सुरति रंग रस लीन

Nikunj Ras Vallari — हित गोपाल दास

Verse 107 of 108

हे री ! मोहि लागत वृन्दावन प्यारो। वृन्दावन मधि राधावल्लभ, मम नैननि कौ तारो॥ मंडल-सेवाकुंज पुलिन सब, ठौर-ठौर छवि भारो। नव मंदिर जोरी की सोभा, 'प्रियासखी' उर धारो॥
कीवे कहा पढ़वे को कहा फलश्यामा चरण कमल की आस