श्यामा चरण कमल की आस

Nikunj Ras Vallari — हित गोपाल दास

Verse 2 of 108

करुणा करि अब लाडली, दीनी सन्मुख ठौर। प्रीती बढे तुम चरण में, सूझे न कोउ और॥ - श्री हित गोपाल दास [सेवा कुञ्ज वाले], निकुंज रस वल्लरी, आशीस दोहा (3) अब दया करो मेरे प्रिय, मुझे अपना विनम्र चेहरा दिखाओ। तेरे चरणों में प्यार बढ़ता है, किसी और को इसकी सिफ़ारिश मत करो.. - श्री हित गोपाल दास [सेवा कुंज वेले], निकुंज रस वल्लरी, आशीष दोहा (3)
श्यामा चरण कमल की आससुखकारी सबके सदा