श्यामा अब तो रह्यौ न जाय
Nikunj Ras Vallari — हित गोपाल दास
Verse 25 of 108
(राग पीलू त्रिताल)
श्यामा अब तो रह्यौ न जाय।
पल-पल याद सताये तिहारी, सेवाकुञ्ज मन भाय॥ [1]
वृन्दाविपिन निकुञ्जन मांही, चरणन रज मिल जाय।
श्रीगोपालहित प्राण जीवनी, भूले नहीं भुलाय॥ [2]
- श्री हित गोपाल दास [सेवा कुञ्ज वाले], निकुंज रस वल्लरी (50)
(राग पीलू त्रिताला) श्यामा, अभी मत जाओ। जब-जब तिहारी तुम्हें प्रतिपल सताता है, सेवाकुंज के मन में भय व्याप्त हो जाता है। [1] वृंदाविपिन निकुंजन मनहिं चरण-रज पावने। श्री गोपालहित प्राण जीवनी, भूले नहीं भूले.. [2] - श्री हित गोपाल दास [सेवा कुंज वेले], निकुंज रस वल्लरी (50)