सुखकारी सबके सदा

Nikunj Ras Vallari — हित गोपाल दास

Verse 26 of 108

पराभक्ति रस वर्धिनी, श्यामा सब सुख दैन। रसिक मुकुट मनि राधिका, जय नव नीरज नैन॥ - श्री हरिव्यास देवाचार्य, महावाणी, सेवा सुख (51) पराभक्ति रस वर्धिनी, श्यामा सब सुख देती है। रसिक मुकुट मणि राधिका, जय नव नीरज नैन.. - श्री हरिव्यास देवाचार्य, महावाणी, सेवा सुख (51)
श्यामा अब तो रह्यौ न जायरे मन श्रीवृन्दावन चल