राधा नाम परम सुखदायी
Nikunj Ras Vallari — हित गोपाल दास
Verse 34 of 108
(राग भैरवी त्रिताल)
राधा नाम परम सुखदायी।
जाके सुमरित उर में आवत, सुन्दर कुँवर कन्हाई॥ [1]
दिव्य केलि श्रीवृंदावन की, मन में रही समाई।
हितमय रसमय नाम पियारो, रसिकन के मन भाई॥ [2]
कालिन्दी की लहर-लहर ने, राधा-राधा धूम मचाई।
गोपालप्रिया हित नाम पियारो, रसना पै रह्यौ छाई॥ [3]
- श्री हित गोपाल दास [सेवा कुञ्ज वाले], निकुंज रस वल्लरी (74)
(राग भैरवी त्रिताल) राधा नाम परम सुख है। जेके सुमरित उर मन आवत, सुन्दर कुँवर कन्हाई.. [1] दिव्य केलि श्री वृन्दावन की, मन मन रहै समाई। हितमय रसमय नाम पियारो, रसिकन के हृदय भाई। [2] कालिंदी, राधा-राधा की लहरों ने मचाई हलचल। गोपालप्रिय हित नाम पियारो, रसना पै रहयौ छै.. [3] - श्री हित गोपाल दास [सेवा कुंज वेले], निकुंज रस वल्लरी (74)