हमारो धन राधा-राधा नाम

Nikunj Ras Vallari — हित गोपाल दास

Verse 36 of 108

(राग विहाग त्रिताल) हमारो धन राधा-राधा नाम। नामहिं जीवन धन हैं अब तो, और ठौर नहिं ठाम॥ [1] रसना नाम सुधा जब पीवै, उर नाँचै श्रीधाम। राधा नामहिं मीठो लागै, भूले सब ही काम॥ [2] अरे बावरे छाँड़ि नाम मणि, जाँचत काहे छदाम। श्रीगोपाल हित जपौ निरन्तर, तब मिलि हैं बिश्राम॥ [3] - श्री हित गोपाल दास [सेवा कुञ्ज वाले], निकुंज रस वल्लरी (77) (राग विहग त्रिताला) हमारो धन राधा-राधा नमः। नमहिं जीवन ही धन है अब, रहने को और कोई ठिकाना नहीं.. [1] रसना नाम सुधा जब पिवै, उर नांचै श्रीधाम। राधा नाम मधुर लगे, भूले सब काम। श्री गोपाल हित गोपाल दास [सेवा कुंज वेले], निकुंज रास वल्लरी (77)
मन श्री राधा-राधा कहि रेसुखकारी सबके सदा