श्यामा चरण कमल की आस
Nikunj Ras Vallari — हित गोपाल दास
Verse 4 of 108
अहो कृपामयी लाड़ली, प्यारी परम उदार।
वन विनोद सुख कारिनी, रसिकन प्राण अधार॥
- श्री हित गोपाल दास [सेवा कुञ्ज वाले], निकुंज रस वल्लरी, आशीस दोहा (5)
हे दयालु प्रियतम, परम उदार प्रियतम! वन विनोद सुख करिणी, रसिकन प्राण आधार.. - श्री हित गोपाल दास [सेवा कुंज वेले], निकुंज रस वल्लरी, आशीष दोहा (5)