सुखकारी सबके सदा

Nikunj Ras Vallari — हित गोपाल दास

Verse 5 of 108

प्रिया बदन सुखमा सदन, रह्यो प्रेम परिपूरि। जा मधि प्रीतम प्राण की, सरबस जीवनि मूरि॥ - श्री हरिव्यास देवाचार्य, महावाणी, सेवा सुख (05) प्रिया बदन सुखमा सदन, रहो प्रेम परिपुरी। जा मधि प्रीतम प्राण की, सरबस जीवनि मुरी.. - श्री हरिव्यास देवाचार्य, महावाणी, सेवा सुख (05)
श्यामा चरण कमल की आसजयति जयति वृषभानु दुलारी