राधे अलबेली सरकार

Nikunj Ras Vallari — हित गोपाल दास

Verse 47 of 108

(राग भुपाली, त्रिताल) राधे अलबेली सरकार। वनरानी रसिकन की प्यारी, अति उदार सुकमार॥ [1] जाके पग नूपुर रव सों ही, कोटि ब्रह्म अवतार। रास विहारिन कुञ्ज विहारिण, महिमा अमित अपार॥ [2] नव-निकुञ्ज की नव निधि राधे, करती नित्त बिहार। श्रीगोपालहित नवल प्रिया पै, बार-बार बलिहार॥ [3] - श्री हित गोपाल दास [सेवा कुञ्ज वाले], निकुंज रस वल्लरी (115) (राग भूपाली, त्रिताल) राधे अलबेली सरकार। वानर रानी रसिकन के प्रिय, अत्यंत उदार सुकमार.. [1] वह कोटि ब्रह्मा के अवतार नुपूर राव के पुत्र हैं। रस विहारिन कुंज विहारिन, महिमा अमित अपार.. [2] नव-निकुंज नव निधि राधे, कराति नित्त बिहार। श्री गोपालहित नवल प्रिया पै, बारा बार बलिहार.. [3] - श्री हित गोपाल दास [सेवा कुंज वेले], निकुंज रस वल्लरी (115)
श्यामा, सूझत नहीं कछु मोहेवृन्दावन छाँड़ि कहूँ सुख नाहीं