जयति जयति वृषभानु दुलारी
Nikunj Ras Vallari — हित गोपाल दास
Verse 6 of 108
(राग शुद्ध कल्याण त्रिताल)
जयति जयति वृषभानु दुलारी।
जय वृन्दावन परम मनोहर, लता फूल फुलवारी॥ [1]
जय वंशीवट जय श्रीयमुना, सेवाकुञ्ज तिहारी।
जयति जय मनमोहन प्यारी, जय जय रसिक हियारी॥ [2]
जय हो श्रीवन व्रज मण्डल की, जय छवि रूप उजारी।
श्रीगोपालहित हरि स्वामिनि, सब व्रज की रखवारी॥ [3]
- श्री हित गोपाल दास [सेवा कुञ्ज वाले], निकुंज रस वल्लरी (06)
(राग शुद्ध कल्याण त्रिताला) जयति जयति वृषभानु दुलारी। जय वृन्दावन, फूलों से भरी परम सुन्दर लता। [1] जय वंशीवट, जय श्रीयमुना, सेवाकुंज तिहारी। जय जय मनमोहन प्यारी, जय जय रसिक हियारी.. [2] जय श्रीवन व्रज मंडल, जय छवि रूप उजारी। श्री गोपालहित हरि स्वामिनी, सब व्रज के रखवाले.. [3] - श्री हित गोपाल दास [सेवा कुंज वाले], निकुंज रस वल्लरी (06)