श्यामा चरण कमल की आस
Nikunj Ras Vallari — हित गोपाल दास
Verse 58 of 108
अहो कृपामयी स्वामिनी, शरण तिहारी आ-गई।
श्रीगोपालहित हरिलाड़िली, टहल महल मन भा-गई॥
- श्री हित गोपाल दास [सेवा कुञ्ज वाले], निकुंज रस वल्लरी
हे दयालु स्वामिनी, शरण तिहारी आये हैं। श्री गोपालहित हरिलादैली, तहल महल मन भा-गाई.. - श्री हित गोपाल दास [सेवा कुंज वेले], निकुंज रस वल्लरी