अलबेले आँगन खरे, अंस अंस भुज धारि।

Nikunj Ras Vallari — हित गोपाल दास

Verse 59 of 108

अलबेले आँगन खरे, अंस अंस भुज धारि। लै दरपन दिखरावहीं, ह्वै सन्मुख सहचारी॥ - श्री हरिव्यास देवाचार्य, महावानी, सेवा सुख चाहे कोई भी आंगन हो, हर हिस्सा हथियारों से लैस है. दर्पण तो केवल दिखाने के लिए है, सामने तो साथी है.. - श्री हरिव्यास देवाचार्य, महावाणी, सेवा सुख
श्यामा चरण कमल की आसश्यामा चरण कमल की आस