श्यामा चरण कमल की आस

Nikunj Ras Vallari — हित गोपाल दास

Verse 60 of 108

अनन्य रसिक वृंदावन प्यारे, मम जीवन रखवारे। कृपा प्रसादी देहूँ मोहे, तव या रस पग धारे॥ - श्री हित गोपाल दास [सेवा कुञ्ज वाले], निकुंज रस वल्लरी प्रिय प्रिय वृन्दावन, प्रिय माँ, जीवन रक्षक। कृपा प्रसादि देहुं मोहे, तव या रस पग धरे.. - श्री हित गोपाल दास [सेवा कुंज वेले], निकुंज रस वल्लरी
अलबेले आँगन खरे, अंस अंस भुज धारि।कीवे कहा पढ़वे को कहा फल