श्यामा चरण कमल की आस

Nikunj Ras Vallari — हित गोपाल दास

Verse 7 of 108

जीवन प्राण अब वन रहो, नवल प्रिया सुखधाम। व्रज वृन्दावन स्वामिनी, ललितादिक अभिराम॥ - श्री हित गोपाल दास [सेवा कुञ्ज वाले], निकुंज रस वल्लरी, आशीस दोहा (6) अब तो जीवन और जीवन एक ही रह गया, नवल प्रिय सुखदाम। व्रज वृन्दावन स्वामिनी, ललितादिक अभिराम.. - श्री हित गोपाल दास [सेवा कुंज वेले], निकुंज रस वल्लरी, आशीष दोहा (6)
जयति जयति वृषभानु दुलारीश्यामा चरण कमल की आस