हे री ! मोहि लागत वृन्दावन प्यारो।
Nikunj Ras Vallari — हित गोपाल दास
Verse 69 of 108
हे री ! मोहि लागत वृन्दावन प्यारो।
वृन्दावन मधि राधावल्लभ, मम नैननि कौ तारो॥ [1]
मंडल-सेवाकुंज पुलिन सब, ठौर-ठौर छवि भारो।
नव मंदिर जोरी की सोभा, 'प्रियासखी' उर धारो॥ [2]
- श्री प्रिया सखी
इतना ही! वृन्दावन अद्भुत लग रहा है प्रिये। वृन्दावन मधि राधावल्लभ, मम नानिनि कौ तारो।।[1] मण्डल-सेवाकुंज पुलिन सब, कण-कण में छवि भर दो। नव मंदिर जोरी की सभा, 'प्रिय सखी' उर धरो.. [2] - श्री प्रिया सखी