देहु निकुंज निवास स्वामिनी

Nikunj Ras Vallari — हित गोपाल दास

Verse 78 of 108

करो कोई जैसे मन भावे, हम तो दम्पत्ति शरण गही है। नित्य-किशोर को जाप उपासन, यह वाणी रसिकिन जो कही है॥ वृंदावन सेवाकुंज श्यामा, प्रीतम संग सुख विलस रही है। “ललितलड़ैती” वसत तहां वे, जिनपे उनकी कृपा भई है॥ - ललित लड़ैती कोई जो चाहे करे, हमने दिव्य युगल (श्री राधा-कृष्ण) की शरण ली है। हम रसिकों के वचनों को आधार मानते हैं और उन्होंने हमें प्रतिदिन किशोर की पूजा करने और सदैव उनका नाम गाने का आदेश दिया है। वृन्दावन के सेवा कुंज में श्री राधा और उनके प्रियतम श्री कृष्ण मिलकर सुख और विलासिता की वर्षा करते हैं। श्री ललित लड़ैती कहते हैं कि वृन्दावन में वही प्राणी निवास करते हैं जिन पर युगल शासन की कृपा होती है। - ललित लड़ैती
कमल से कोमल ओ चीकने जू माखन ते,देहु निकुंज निवास स्वामिनी