श्यामा चरण कमल की आस

Nikunj Ras Vallari — हित गोपाल दास

Verse 86 of 108

प्रिया तेरे चरण कमल की चेरी। कुञ्ज द्वार पै ठाडी कब सों, करो नहीं अब देरी॥ [1] कृपा करो अब झलक दिखावो, ये अभिलाषा मेरी। सेवा कुञ्ज निकुञ्ज भवन में, नित ही करो तुम फेरी॥ [2] दया करो अब भूल न जइयो, रखियो अपनी चेरी। 'हित गोपाल' की भोरी स्वामिनि, सुन लो विनती मेरी॥ [3] - श्री हित गोपाल दास [सेवा कुञ्ज वाले], निकुंज रस वल्लरी प्रिया, तुम्हारे चरण कमलों की चेरी। कब बैठोगे बगीचे के द्वार पर, बेटा अब देर मत करो.. [1] अब तो झलक दिखा दो, यही चाहत है. सेवा कुंज निकुंज भवन में, करो नित नित। [2] दया करो, अब मत भूलो, अपनी चेरी रखो। 'हित गोपाल' की प्रिय स्वामिनी, कृपया मेरी विनती सुनें.. [3] - श्री हित गोपाल दास [सेवा कुंज वेले], निकुंज रस वल्लरी
मोहि वास सदा वृन्दावन कौं, नित उठ यमुना पुलिन नहाऊँ। [1]कीवे कहा पढ़वे को कहा फल