कीवे कहा पढ़वे को कहा फल
Nikunj Ras Vallari — हित गोपाल दास
Verse 87 of 108
सेवाकुंज जु प्यारी ठौर | जहाँ नित बिहरैं साँवल गौर ||
आज्ञा दै मंदिर बनबायौ | तहँ हित हाथ सौं भोजन पायौ ||
मंदिर भोग धरत हौ जैसें | सेवाकुंज धरौ नित ऐसें ||
रजनी वहाँ आवै नहिं कोऊ | यामें नित संतत हम दोऊ ||
- अज्ञात