बाँह डुलावति आवति राधा
Paramanand Sagar — श्री परमानन्द दास
Verse 10 of 33
ब्रज के श्वपच बड़े बड़भागी।
जा रजकों ब्रह्मादिक तरसें सो इन अंगन लागी॥ [1]
महाप्रसाद नित्यप्रति पावत तातें अति अनुरागी।
परमानन्द कहाँ लौं वरनौं प्रेमभक्ति रसपागी॥ [2]
- श्री परमानन्द दास, परमानंद सागर
ब्रज का नाम अशुभ है। जा राजकोन ब्रह्मादिक तारासेन सो आंगन लागी.. [1] महाप्रसाद नित्यप्रति पावत तातेन अति प्रिय है। प्रेम और भक्ति के बदले मुझे सुख कहां मिलेगा... [2] - श्री परमानंद दास, परमानंद सागर