चलि राधा! तोकौं स्याम बुलावै

Paramanand Sagar — श्री परमानन्द दास

Verse 12 of 33

(राग बसंत) चलि राधा! तोकौं स्याम बुलावै। उहै देखि बैनु मधुरे धुनि, तेरौ नामहिं लै लै गावै॥ [1] देखौ वृन्दावन की सोभा, ठौर ठौर द्रुम फूलें। कोकिल नाद सुनत मन आनन्द, भँवर भ्रमत रस-झूलें॥ [2] उन्मद जोवन मदन कुलाहल, यह औसर है नीकौ। ‘परमानन्द’ प्रभु प्रथम समागम, मिलयौ भावतौ जीकौ॥ [3] - श्री परमानन्द दास जी, परमानंद सागर (1194) (राग बसंता) चलो राधा! टोकौं सियाम बुलावै। उहय देखि बैनु मधुरे धूनि, तेरौ नामहिं लै लै गावै.. [1] वृन्दावन की शोभा तो देखो, जगह-जगह नगाड़े बज रहे हैं। बुलबुल की ध्वनि सुनकर मन प्रसन्न हो जाता है, भँवर भ्रमित हो जाता है, रस छलक जाता है... [2] उन्मादी जोवन मदन कुल्हाल, इस अवसर का लाभ उठाओ। 'परमानंद' प्रभु प्रथम समागम, मिलयौ भवतौ जिकौ.. [3] - श्री परमानंद दास जी, परमानंद सागर (1194)
ब्रज में होत कुलाहल भारीधन धन राधिका के चरन