धन धन राधिका के चरन
Paramanand Sagar — श्री परमानन्द दास
Verse 13 of 33
(राग विहाग व गौरी)
धन धन राधिका के चरन।
सुभग शीतल अतिसे कोमल कमल के से वरन॥
नख चन्द्रिका अनूप राजत विविध शोभा वरन।
कुन्नित नूपुर कुँज विहरत परम कौतुक करन॥
नन्द सुत मन मोद कारी, विरह सागर तरन।
दास परमानन्द छिन-छिन श्याम जाकी शरन॥
- श्री परमानन्द दास, परमानंद सागर (581)
(राग विहाग वि गौरी) धन धन राधिका चरण। सुन्दर, शीतल एवं कोमल कमल पुष्प। नाखून चंद्रमा और चांदी जैसी विभिन्न सुंदरताओं से सुशोभित हैं। कुन्नित नूपुर कुंज विहार एक पूर्ण आश्चर्य है। नंद सुत मन मोद कारी, विरह सागर तरण। दास परमानन्द छिन-छिन श्याम जकी शरण.. - श्री परमानन्द दास, परमानन्द सागर (581)