कौन रसिक है इन बातनि कौ
Paramanand Sagar — श्री परमानन्द दास
Verse 17 of 33
(राग कान्हरो)
कौन रसिक है इन बातनि कौ।
नंदनंदन बिनु कासों कहिए
सुनिरी सखी मेरे दुःख या तन कौ॥ [1]
कहाँ वह जमुना पुलिन मनोहर
कहाँ वह चंद सरद-रातनि कौ॥ [2]
कहाँ वह सेज पौढिबौ बन कौ
फूल बिछौना मृदु पातनि कौ। [3]
कहाँ वह मंद-सुगंध अनिल-रस
कहाँ वह षटपद जल-जातनि कौ। [4]
कहाँ वह दरस परस 'परमानंद'
कमलनैन कोमल गातनि कौ॥ [5]
- श्री परमानन्द दास, परमानंद सागर (1001)
(राग कान्हारो) बताओ रसिक कौन है? नन्दनन्दन के बिना मेरा दुःख और मेरा शरीर कहाँ है? मेरे दोस्त कहाँ हैं? [1] जमुना के सुन्दर तट कहाँ हैं? [3] कहाँ है वह मधुर-सुगन्धित अनिल-रस, कहाँ है वह शतपद जल-जटानि? [4] वह दरस पारस 'परमानंद' कमलनैन कोमल गतनि कौ.. [5] - श्री परमानंद दास, परमानंद सागर (1001)