आरती युगल किशोर की

Paramanand Sagar — श्री परमानन्द दास

Verse 3 of 33

(राग गोरी) आरती युगल किशोर की कीजै। तन मन धन न्योछावर दीजै॥[1] गौर श्याम मुख निरखत जीजै। प्रेम स्वरूप नयन भर पीजै॥ [2] रवि शशि कोटि वदन की शोभा। ताहि देखत मेरौ मन लोभा॥ [3] नंद नंदन वृषभानु किशोरी। परमानन्द प्रभु अविचल जोरी॥ [4] - श्री परमानन्द दास, परमानंद सागर (380) (राग गोरी) आरती युगल किशोर कीजय। तन, मन, धन सब कुछ कुर्बान..[1] गौर श्याम मुख निरखत जिजै। भर लो अपनी आँखों में प्यार का रूप.. [2] रवि शशि लाखों लोगों की शोभा है। इसलिए मेरा मन लालची है. [3] नन्द नन्दन वृषभानु किशोरी। परमानन्द प्रभु अविचल जोरि.. [4] - श्री परमानन्द दास, परमानन्द सागर (380)
बाँह डुलावति आवति राधाबाँह डुलावति आवति राधा