एहो सुकुमारी प्रान प्यारी हौ बिहारी जू की

Prem Das Vani — श्री लाल बलबीर

Verse 10 of 11

श्रीराधे अब बेग सम्हारौ। अहो नागरी झेर न कीजै, अपनी चेरी जान निहारौ॥ [1] संशय हरौ ढरौ निज परिकर, यह अभिलाख हमारौ। प्रेमसखी की अहो स्वामिनी, यह संदेह निवारौ॥ [2] - श्री प्रेमदास जी (लाल बलबीर जी के भ्राता), श्री प्रेम दास जी की वाणी (97) श्रीराधे अब बेग संहारौ। ऐ शहर, मत निकल जाना, देख अपने प्यारे लोगों को। हे प्रेम की स्वामिनी, यह प्रेम का भ्रम है.. [2] - श्री प्रेमदास जी (लाल बलबीर जी के भाई), श्री प्रेम दास जी की वाणी (97)
एहो सुकुमारी प्रान प्यारी हौ बिहारी जू कीएहो सुकुमारी प्रान प्यारी हौ बिहारी जू की