एहो सुकुमारी प्रान प्यारी हौ बिहारी जू की
Prem Das Vani — श्री लाल बलबीर
Verse 9 of 11
श्रीवृन्दावन-चन्द्र छवि, श्रीराधा वर नाम।
गाजै राजै कवि हियैं, विमल चारु कर धाम॥
- श्री प्रेमदास जी (लाल बलबीर जी के भ्राता), श्री प्रेम दास जी की वाणी (86.2)
श्री वृन्दावन-चन्द्र छवि, श्री राधा वर नमः। गाजै राजाई कवि, विमल चारु कर धाम.. - श्री प्रेमदास जी (लाल बलबीर जी के भाई), श्री प्रेम दास जी के शब्द (86.2)