एहो सुकुमारी प्रान प्यारी हौ बिहारी जू की
Prem Das Vani — श्री लाल बलबीर
Verse 4 of 11
किशोरी मोहि श्रीवन वास बसावौ।
सदां रहौं चरनन की दासी, यह अभिलाख पुजावौ॥ [1]
और न देखौं इन नैंनन सों, गुननहि हीय सिहावौ।
प्रेमसखी तुमरे गुन गुन गुन, सुन सुन तुमैं रिझावौ॥ [2]
- श्री प्रेमदास जी (लाल बलबीर जी के भ्राता), श्री प्रेम दास जी की वाणी (91)
किशोरी मोही श्रीवान बसावौ में रहती है. घरे रहिये चरणन दासी, यं अभिलख पूजवौ।।[1] और अपने बेटे की इन आँखों में मत देखो, यह कोई पाप नहीं है। प्रेमसखि तुमरे गुन गुन गुन, सुन सुन तुमैं रिझौ.. [2] - श्री प्रेमदास जी (लाल बलबीर जी के भाई), श्री प्रेम दास जी की वाणी (91)