एहो सुकुमारी प्रान प्यारी हौ बिहारी जू की

Prem Das Vani — श्री लाल बलबीर

Verse 5 of 11

मैं दरसन बिन अनमनी, बैठोंगी मुख मोर। कब मोसों कहैं लाड़ली, क्यौं रूषौ मन तोर॥ - श्री प्रेमदास जी (लाल बलबीर जी के भ्राता), श्री प्रेम दास जी की वाणी (86.4) मैं बिना किसी हिचकिचाहट के आमने-सामने बैठूंगा. महीनो में कब कहें डार्लिंग, क्यों टूटे दिल.. - श्री प्रेमदास जी (लाल बलबीर जी के भाई), श्री प्रेम दास जी के शब्द (86.4)
एहो सुकुमारी प्रान प्यारी हौ बिहारी जू कीएहो सुकुमारी प्रान प्यारी हौ बिहारी जू की