एहो सुकुमारी प्रान प्यारी हौ बिहारी जू की

Prem Das Vani — श्री लाल बलबीर

Verse 6 of 11

(कवित्त) प्यारी नख चन्दन कौं कीजिये चकोर मन, राधे गुन गानन कौं पिक कर दीजिये। [1] फूले पद कंजन कौं करिये मधुप मोई, बिरद बखाननबै कौं कोइल करीजिये॥ [2] कीजिये मराल जो पै दीजै गति आप प्यारी, कैकी कर केल रेल श्याम घन भीजिये। [3] कीजै द्रुम बेली बाग श्रीवन निकुंजन में, प्रेमसखी तू ही धनी भावै तैसी कीजिये॥ [4] - श्री प्रेमदास जी (लाल बलबीर जी के भ्राता), श्री प्रेम दास जी की वाणी (93) (कविता) मधुर नख, चंदन, प्रेममय हृदय कौन खोजेगा, गुण गिनकर राधे को कौन चुनेगा। [1] कौन करे फुले पद कांजन, मधुप मोई, पक्षी बखाननबाई, कौन करे कोइल.. [2] दो मारल जो पै गति गति आप कैकी, भेजो केल रेल श्याम घन। [3] किजै द्रुम बेली बैग श्रीवन निकुंजन मन, प्रेमसखी तू ही धनि भावै तैसी कीजिये.. [4] - श्री प्रेमदास जी (लाल बलबीर जी के भाई), श्री प्रेम दास जी की वाणी (93)
एहो सुकुमारी प्रान प्यारी हौ बिहारी जू कीरूप हद नेह हद मधुर अनूप हद