एहो सुकुमारी प्रान प्यारी हौ बिहारी जू की
Prem Das Vani — श्री लाल बलबीर
Verse 8 of 11
श्रीगुरु दीन दयाल जू, यह अभिलाषा मोर।
जुगल चन्द पद कंज छबि, मन मलिन्द गत चोर॥
- श्री प्रेमदास जी (लाल बलबीर जी के भ्राता), श्री प्रेम दास जी की वाणी (86.1)
श्री गुरु दीन दयाल जू, या अभिलाषा मोर। जुगल चंद पद कंज छवि, मन मलिंद गत चोर.. - श्री प्रेमदास जी (लाल बलबीर जी के भाई), श्री प्रेम दास जी की आवाज (86.1)