राधेजू मेरौ जनम सुधारौ।

Radha Sudha Nidhi — श्री हित हरिवंश महाप्रभु

Verse 118 of 124

राधेजू मेरौ जनम सुधारौ। अब मोंहि वृन्दावन में डारौ॥ - श्री गोविन्दशरण देवाचार्य राधेजू मेरा जन्म सुधारो। अब वृन्दावन में साधुओं को डर लगता है.. - श्री गोविंदशरण देवाचार्य
कालिन्दी-कूल-कल्प-द्रुम-तल निलय प्रोल्लसत्केलिकन्दा, वृंदातव्यं सदैव पलोग कुटुम सुख अर्थ अनन्तहि