लोग कुटुम सुख अर्थ अनन्तहि

Radha Sudha Nidhi — श्री हित हरिवंश महाप्रभु

Verse 17 of 124

संकेतकुंजमनुकुंजरमन्दगामि न्यादाय दिव्यमृदुचन्दन गन्धमाल्यम्। त्वां कामकेलिरभसेन कदा चलन्तीं राधेऽनुयामि पदवीमुपदर्शयन्ती॥ - श्री हित हरिवंश महाप्रभु, श्री राधा सुधा निधि (22) सर्पेत्कुंजमनुकुंजर्मन्दगमि न्यायदाय दिव्यमृदुचन्दं गन्धमाल्यम्। त्वं कामकेलिराभसेन कदा चलतिं राधेऽनुयामि पद्विमुपदर्शयन्ति।।- श्री हित हरिवंश महाप्रभु, श्री राधा सुधा निधि (22)
लोग कुटुम सुख अर्थ अनन्तहिलोग कुटुम सुख अर्थ अनन्तहि