विदग्ध सुन्दरी-बृन्द वर चूडामणे कदा।
Radha Sudha Nidhi — श्री हित हरिवंश महाप्रभु
Verse 31 of 124
विदग्ध सुन्दरी-बृन्द वर चूडामणे कदा।
महारसनिधे राधे पदमाराधये तव॥
- श्री हित कृष्ण चंद्र, श्री राधा उपसुधा निधि (36)
विद्याधा सुंदरी-बृंदा वर चूड़ामने कदा। महरसनिधे राधे पद्माराधये तव.. - श्री हित कृष्ण चन्द्र, श्री राधा उपसुधा निधि (36)