हा राधे स्वामिनि कदा किशोरी दिव्य रूपिणी।

Radha Sudha Nidhi — श्री हित हरिवंश महाप्रभु

Verse 32 of 124

हा राधे स्वामिनि कदा किशोरी दिव्य रूपिणी। प्रेमैक रसमग्राहं भवेयं तव किंकरी॥ - श्री हित कृष्ण चंद्र, श्री राधा उपसुधा निधि (37) हाँ राधे स्वामिनी, यदा-कदा किशोर दिव्य सुन्दरी। प्रेमिके रस संग्रहं भवंतव किंकरी।।- श्री हित कृष्ण चन्द्र, श्री राधा उपसुधा निधि (37)
विदग्ध सुन्दरी-बृन्द वर चूडामणे कदा।(कुण्डलिया)