लोग कुटुम सुख अर्थ अनन्तहि

Radha Sudha Nidhi — श्री हित हरिवंश महाप्रभु

Verse 81 of 124

येषां प्रेक्षा वितरति नवोदार गाढ़ानुरागान्, मेघश्यामो मधुर-मधुरानन्द मूर्तिर्मुकुन्द:। वृन्दाटव्यां सुमहिम चमत्कार कारीण्यहो किं, तानि प्रेक्षेद्भुत रस निधानानि राधा पदानि॥ - श्री हित हरिवंश महाप्रभु, श्री राधा सुधा निधि (103) येषां प्रेक्षा वितरण नवोदर गधानुर्गम, मेघश्यामो मधुर-मधुरानंद मूर्तिमुकुन्दः। वृन्दत्वं सुमहिं चमत्कार करण्याहो, तानि प्रक्षितभूत रस निधानी राधा पदनि.. - श्री हित हरिवंश महाप्रभु, श्री राधा सुधा निधि (103)
लोग कुटुम सुख अर्थ अनन्तहिलोग कुटुम सुख अर्थ अनन्तहि