लोग कुटुम सुख अर्थ अनन्तहि

Radha Sudha Nidhi — श्री हित हरिवंश महाप्रभु

Verse 82 of 124

अलिन्दे कालिन्दनी- तट नवलता-मन्दिरवरे रतामर्दोंद्भुतश्रमजल- भरापूर्णवपुषो:। सुखस्पर्शेनामीलितनयनयो : शीतमतुलं , कदा कुर्य्या सम्बीजनमहह राधा-मुरभिदो :॥ - श्री हित हरिवंश महाप्रभु, श्री राधा सुधा निधि (165) आलिन्दे कालिंदनि- तत् नवलता-मंदिरवरे रत्मर्दोंद्भूताश्रमजला- भारपूर्णवापुषो। सुखस्पर्शेनमिलितनानयोः सीतलमतुल्न, कदा कुर्या संबिजनामः राधा-मुराभिदोः। - श्री हित हरिवंश महाप्रभु, श्री राधा सुधा निधि (165)
लोग कुटुम सुख अर्थ अनन्तहिलोग कुटुम सुख अर्थ अनन्तहि