लोग कुटुम सुख अर्थ अनन्तहि

Radha Sudha Nidhi — श्री हित हरिवंश महाप्रभु

Verse 83 of 124

करे कमलमद्भुतं भमयतोर्मिथोंसार्पित, स्फुरत्पुलक दोर्लता युगलयो: स्मरोन्मत्तयो:। सहास-रास-पेशलं मद करीन्द्र-भङ्गीशतै- र्गर्ति रसिकयोर्द्वयो: स्मरत चारु वृन्दावने॥ - श्री हित हरिवंश महाप्रभु, श्री राधा सुधा निधि (171) करे कमलमद्भूतं भामयतोरमितोन्सरिपिता, स्फुरत्पुलका दोरलता युग्यलयोः स्मरोमन्मतयोः। सहसा-रस-पेशलान मद करिन्द्र-भंगिशै- रग्रति रसिक्योरद्वयोः स्मरत् चारु वृन्दावन।।- श्री हित हरिवंश महाप्रभु, श्री राधा सुधा निधि (171)
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