लोग कुटुम सुख अर्थ अनन्तहि

Radha Sudha Nidhi — श्री हित हरिवंश महाप्रभु

Verse 84 of 124

चलत्कुटिल कुन्तलं तिलक - शोभि-भालस्थलं, तिल-प्रसव नासिका - पुट-विराजि मुक्ता-फलम्। कलंकरहितामृतच्छवि समुज्ज्वलं राधिके, तवाति रति-पेशलं वदन-मण्डलं भावये॥ - श्री हित हरिवंश महाप्रभु, श्री राधा सुधा निधि (185) चलत्कुटिल कुन्तलन तिलक - शोभि-भलस्थलन, तिल-प्रसव नासिका - पूत-विराजी मुक्ता-फलम्। कलंकराहितमृच्छवि समुज्ज्वलं राधिके, तवति रति-पेशलं वदना-मंडलं भावय.. - श्री हित हरिवंश महाप्रभु, श्री राधा सुधा निधि (185)
लोग कुटुम सुख अर्थ अनन्तहिलोग कुटुम सुख अर्थ अनन्तहि