रसिकवर रसिकनी रस रासि
Ras Ke Pada —
Verse 11 of 28
प्रियालाल खेलत बसंत।
झाँझ, मुरज, डफ, बाँसुरी अरु वीना-मुहचंग लसंत॥ [1]
बजत, नचत, नवनव गति अद्भुत, दोऊ मिलि हुलसंत।
श्रीललितमोहिनी कौ सुख बाढयौ, पूरन रस विलसंत॥ [2]
- श्री ललित मोहिनी देव, ललित मोहिनी देव जू की वाणी, रस के पद (51)
बसंत का किरदार प्रियालाल ने निभाया है। झांझ, मर्ज, डफ, बांसुरी और वीणा-मुहाचंग लसंत.. [1] बजत, नाचत, नई गति अद्भुत, दोउ मिलि हुलसांत। श्री ललित मोहिनी सुख कामना, पूरन रस विलासन्त। [2] - श्री ललित मोहिनी देव, ललित मोहिनी देव जू की वाणी, रस के छंद (51)