रसिकवर रसिकनी रस रासि
Ras Ke Pada —
Verse 13 of 28
रोम-रोमनि अरुझि विलसत कामिनी।
तन में तन, मन में मन बसि रहे, रस बाढ्यौ सुख जामिनी॥ [1]
गावत सब सुर तार मिलीं रस, विहँसत हँसत प्रकास स्वामिनी।
श्रीललितमोहिनी यह छवि जोहनी, खेलौ हँसौ सुखधाम धामिनी॥ [2]
- श्री ललितमोहिनी देव, श्री ललितमोहिनी देव जू की वाणी, रस के पद (49)
रोमा-रोमांटिक अरुझी विलासत कामिनी। तन में मन, मन में मन, रस बधायौ सुख जामिनी वास। [1] गावत सब सुर रस मिश्रित विहंसत हंसत प्रकाश स्वामिनी। श्री ललिता मोहिनी, यह छवि है जॉनी, खेलें आनंद सुख धामिनी। [2] - श्री ललितमोहिनी देव, श्री ललितमोहिनी देव जू की वाणी, रस के पद (49)