रसिकवर रसिकनी रस रासि
Ras Ke Pada —
Verse 15 of 28
यह आनंद कह्यौ ना परै री,
सेज महल क्रीड़त दोउ प्रीतम, सेवर समर हरै री॥ [1]
कोटि अनंग बलि-बलि या छवि पर, रस बरसत न भरै री।
श्री ललित मोहिनी यह सुख विलसत देखत नैन सिरै री॥ [2]
- श्री ललित मोहिनी देव, ललित मोहिनी देव जू की वाणी, रस के पद (48)
याह आनंद कह्यौ न पराई री, सेज महल क्रीदत दोउ प्रीतम, सेवर समर हरै री.. [1] कोटि अंग बाली-बाली या छवि पार, रस बरसात न भरै री। श्री ललित मोहिनी यः सुख विलासत देखत नैन सिरै री.. [2] - श्री ललित मोहिनी देव, ललित मोहिनी देव जू की वाणी, रस पद (48)