बंसरी बजावै नन्द जू कौ लाल

Ras Ke Pada —

Verse 16 of 28

(राग श्याम कल्याण) बंसरी बजावै नन्द जू कौ लाल। जमना तट बंसीवट ठाड़ौ, सुन्दर रूपरसाल॥ [1] मोर मुकुट पीताम्बर सोहै, चंचल नैंन विशाल। कानन कुण्डल गल बिच माला, श्रीतिलक दिये भाल॥ [2] वृन्दावन में रास रच्यौ है, राधा फिरत खुशाल। 'गुरुछौना' के हिये बसे नित, दरसन करत निहाल॥ [3] - श्री गुरु छौनाजी महाराज, रास महोत्सव के पद (103) (राग श्याम कल्याण) बंसरी बजावै नंद जू कौ लाल। जमना तत् बंसीवत थडौ सुन्दर सौन्दर्य। [1] मोर मुकुट अति गरम, चंचल नयन विशाल। कानन कुण्डल गल बिच माला, श्रीतिलक दिय भाल.. [2] तुमने वृन्दावन में रास रचाया है, राधा मगन घूम रही हैं। 'गुरुछौना' के आधार पर, मैं हर दिन दर्शन का आनंद लेता हूं.. [3] - श्री गुरु छौनाजी महाराज, रास महोत्सव पोस्ट (103)
रसिकवर रसिकनी रस रासिआजु प्यारी के संगि रसिक राइ गुपाल