आजु प्यारी के संगि रसिक राइ गुपाल

Ras Ke Pada —

Verse 17 of 28

(राग पूर्वी) आजु प्यारी के संगि रसिक राइ गुपाल। अति छवि पावत गावत दोउ चलत चाल मराल॥ [1] करत विहार विलास रास मों मान लेत करताल। केवलजन रसु बड़ौ (है) परसपर द्रुम बेली बेहाल॥ [2] - श्री केवल राम जी, रास मान के पद (17) (राग पूर्वी) आजु प्यारी के साथी रसिक राय गुपाल। अति छवि पावत गावत दोउ चलत चल मराल।।[1] करत विहार विलास रस मोन मन लेट करतल। केवलजन रसु बदौ (है) परसपार ढोल बेली बेहाल.. [2] - श्री केवल राम जी, रस मन के पद (17)
बंसरी बजावै नन्द जू कौ लालबैठी है झरोखे प्यारी कुंज