मानुनी मानु कीओ किह काज

Ras Ke Pada —

Verse 20 of 28

(राग किदारा) मानुनी मानु कीओ किह काज। रहत अधीन दीन मोहन जिउ बाह गहे की लाज॥ [1] तू वाँ की सोभा संपत्ति है वह तव परमसमाज। केवल मुसकि मिलो श्री भामुनि चलिए नवसत साज॥ [2] - श्री केवल राम जी, रास मान के पद (18) (राग किदारा) मनु मनु कियो किह काज। दिन मोहन जी के वश में रहता है, उनकी लाज बहती है.. [1] तुम ही वन की शोभा और सम्पदा हो, वही परम समाज है। केवल मुसाकि मिलो श्री भामुनि चली नवसत साज.. [2] - श्री केवल राम जी, रस मन के पद (18)
कहा कहों कछु कहनु न आवेनाचत दोउ रास मंडल थई थई तत थई