नाचत दोउ रास मंडल थई थई तत थई
Ras Ke Pada —
Verse 21 of 28
(राग केदारो)
नाचत दोउ रास मंडल थई थई तत थई।
प्रेम उमडि रीझि रीझि गावत सुरि थोरी॥ [1]
इक तें इक गति सुढार तान मान सम बिहार।
खेलत रस मै प्रवीन राधिका किसोरी॥ [2]
रुणझुण नूपर बिसाल चलत है जैसी बाल।
छवि देखत भ्रांति मैन मनसा की तोरी॥ [3]
भाँति भाँति करि केल आनंद रस सिंधु झेल।
केवल जुग जुग बिहार वृंदावन जोरी॥ [4]
- श्री केवल राम जी, रास मान के पद (10)
(राग केदारो) नाचत दोउ रस मंडल थाई थाई तात थाई। प्रेम उमादि रीझी रीझी गावत सुरि थोरी.. [1] एक तेन एक गति सुधार तन मन सम बिहार। बांसुरी बजा रही है मेरी विशेषज्ञ राधिका किसोरी.. [2] रुनझुन नुपर बिसाल बाल की तरह हिल रही है। छवि देखकर मैं भ्रमित हो गया। [3] सिन्धु की ख़ुशी के साथ मैंने अलग-अलग तरीकों से ऐसा ही किया। केवल जुग जुग बिहार वृन्दावन जोरी.. [4] - श्री केवल राम जी, रस मन के पद (10)