प्यारी तेरो मानु मनावन आँई
Ras Ke Pada —
Verse 22 of 28
(राग कानरा)
नवल लाल ब्रिषभान दुलारी।
थइ थइ करत रास रस खेलत इक तें इक नौतन गति न्यारी॥ [1]
तान बँधान सपत सुर गावत रीझत देखि सरद उजिआरी।
केवल लाल तोरि त्रिणु बोल्ये तो सम को नाँहिन पिय प्यारी॥ [2]
- श्री केवल राम जी, रास मान के पद (23)
(राग कनरा) नवल लाल बृषभान दुलारी। थाई थाई करत रस रस खेलत एक दास एक नौतन गति अद्वितीय.. [1] तन बंधन सप्त सुर गावत रीझत देखि सरद उजियारी। केवल लाल तोरी त्रिनु बलाई तो सम को नहीं पिया प्यारी.. [2] - श्री केवल राम जी, रस मन के पद (23)